Saturday, July 18, 2009

अस्पताल के बाहर teliphone


इस तरह मैं (२०००) स्त्री मेरे भीतर (२००४) के बाद अस्पताल के बाहर टेलीफोन (२००९) कविता संग्रह प्रकाशित हो गया है इसे भी राजकमल ने प्रकाशित किया है iski keemat 150 रूपये hai

2 comments:

अशोक कुमार पाण्डेय said...

badhaai

सुशीला पुरी said...

मै पूजा की दीदी , पवन जी ! 'अस्पताल के बाहर टेलीफोन ' मैंने भी पढ़ी ......नया शिल्प और इस बार कहाँ का नया अंदाज भाया, हार्दिक बधाई .